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हाईकोर्ट का बड़ा एक्शन! पत्नी के हत्यारे की उम्रकैद बरकरार, काशीपुर युवक की मौत पर दोबारा होगा पोस्टमार्टम



BIG UPDATE खबर:

स्लग : हाईकोर्ट से दो बड़े फैसले

रिपोर्टर : चित्रांश सक्सेना

लोकेशन : नैनीताल/काशीपुर

टॉप हेडलाइन :

हाईकोर्ट का बड़ा एक्शन! पत्नी के हत्यारे की उम्रकैद बरकरार, काशीपुर युवक की मौत पर दोबारा होगा पोस्टमार्टम

सबहेड :

एक मामले में उम्रकैद की सजा पर लगी मुहर, दूसरे में कब्र से शव निकालकर नए सिरे से पोस्टमार्टम के आदेश

एंकर :

नैनीताल हाईकोर्ट से आज दो ऐसे फैसले आए हैं जिन्होंने पूरे उत्तराखंड में कानूनी गलियारों से लेकर आम जनता तक हलचल मचा दी है। एक तरफ पत्नी की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए आरोपी को हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिली और उसकी उम्रकैद की सजा बरकरार रखी गई। वहीं दूसरी तरफ काशीपुर के चर्चित युवक मौत मामले में कोर्ट ने बड़ा आदेश देते हुए शव को कब्र से निकालकर दोबारा पोस्टमार्टम कराने के निर्देश दिए हैं। आइए बताते हैं दोनों मामलों की पूरी कहानी।

पहला मामला ऋषिकेश का है, जहां चंद्रेश्वर नगर निवासी रूपा की वर्ष 2017 में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। मृतका के भाई ने आरोप लगाया था कि पति रोशन लाल अक्सर पत्नी के चरित्र पर शक करता था और उसके साथ मारपीट करता था। आरोप था कि 31 अक्टूबर और 1 नवंबर 2017 की रात रोशन लाल ने तार से गला घोंटकर अपनी पत्नी की हत्या कर दी।



मामले की सुनवाई के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ आरोपी ने नैनीताल हाईकोर्ट में आपराधिक अपील दायर की थी। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आत्महत्या की थ्योरी रखी, लेकिन हाईकोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी की दलीलों को खारिज कर दिया।



न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों की श्रृंखला पूरी तरह मजबूत और अटूट है, जो सीधे आरोपी की ओर इशारा करती है। कोर्ट ने माना कि रूपा की मौत गला घोंटे जाने से हुई थी और आरोपी अपनी पत्नी की मौत को लेकर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा।


अब बात करते हैं काशीपुर के उस मामले की जिसने पूरे क्षेत्र में सवाल खड़े कर दिए हैं। कटोराताल निवासी इमरान ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया कि उनके बेटे की मौत सामान्य नहीं बल्कि हत्या है। याचिका के अनुसार 16 मई को उनका बेटा घर की छत पर मृत मिला था और शव के आसपास खून फैला हुआ था। पोस्टमार्टम के बाद शव को दफना दिया गया, लेकिन परिजनों ने मौत पर गंभीर सवाल उठाए।



मृतक के पिता का कहना है कि बेटे के कान के नीचे चोट के निशान थे और उन्हें हत्या की आशंका है। इसी आधार पर उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने बड़ा आदेश जारी किया है।



हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि शव को कब्र से बाहर निकालकर दोबारा पोस्टमार्टम कराया जाए। इसके लिए सुशीला तिवारी राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी के विशेषज्ञ डॉक्टरों का पैनल बनाया जाएगा। यही पैनल नए सिरे से पोस्टमार्टम कर अपनी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करेगा। मामले की अगली सुनवाई 15 जून को निर्धारित की गई है।
 

नैनीताल हाईकोर्ट के ये दोनों फैसले साफ संदेश देते हैं कि न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्य और वैज्ञानिक जांच की अहम भूमिका है। एक मामले में अदालत ने हत्यारे की उम्रकैद बरकरार रखी, तो दूसरे मामले में मौत के कारणों की सच्चाई सामने लाने के लिए दोबारा पोस्टमार्टम का रास्ता खोल दिया। अब सबकी निगाहें 15 जून की अगली सुनवाई और नई पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हैं।

चित्रांश सक्सेना

काशीपुर

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