नो एंट्री से पहले शहर में मौत का खेल!
काशीपुर में नो एंट्री खत्म होने से पहले ही भारी डंपरों की शहर में एंट्री आम लोगों के लिए खतरा बनती जा रही है। पैगा बॉर्डर से लेकर टांडा चौराहा, टांडा तिराहा, स्टेडियम, खड़कपुर देवीपुरा, चैती चौराहा और आईटीआई क्षेत्र तक तेज रफ्तार डंपर सड़कों पर दौड़ते नजर आते हैं। सवाल यह है कि आखिर इन बेलगाम वाहनों पर लगाम कब लगेगी?
काशीपुर के पैगा बॉर्डर से शहर में प्रवेश करने वाले डंपर नो एंट्री का समय होने से पहले ही सीमा में दाखिल हो जाते हैं। तेज रफ्तार और लापरवाही से दौड़ते ये भारी वाहन सड़क पर चलने वाले लोगों के लिए लगातार खतरा बने हुए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि टांडा चौराहा सबसे संवेदनशील स्थानों में से एक है, जहां किसी भी समय बड़ा सड़क हादसा हो सकता है। इसके बावजूद भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रभावी नियंत्रण दिखाई नहीं देता।
टांडा चौराहे से खड़कपुर देवीपुरा, चैती चौराहा और आईटीआई क्षेत्र तक डंपरों का दबाव लगातार बना रहता है। इससे दोपहिया वाहन चालकों, पैदल राहगीरों और स्थानीय व्यापारियों में डर का माहौल है।
सोमवार और शुक्रवार को खड़कपुर देवीपुरा क्षेत्र में सड़क किनारे साप्ताहिक बाजार भी लगता है। स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब भारी वाहनों का आवागमन रहता है, तब सड़क किनारे देर तक बाजार लगने की अनुमति क्यों दी जाती है? यदि यातायात प्रबंधन समय रहते नहीं सुधरा, तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है? शहरवासियों की मांग है कि नो एंट्री के नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए, बेलगाम डंपरों पर प्रभावी कार्रवाई हो और संवेदनशील क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था को तत्काल मजबूत किया जाए, ताकि किसी अनहोनी से पहले लोगों की जान सुरक्षित रह सके।