Editor Desk

अचानक क्यों महंगी हो रही चीनी? 65 रुपये किलो तक पहुंचा भाव; आपकी जेब पर क्या होगा असर?




रखा गया है, इसलिए सरकार इनके उत्पादन, कीमत, बिक्री, भंडारण और आयात-निर्यात को नियंत्रित कर सकती है।
1955: आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत चीनी और गन्ने को आवश्यक वस्तुओं में शामिल किया गया।


1966: गन्ना नियंत्रण आदेश के तहत केंद्र सरकार को किसानों के लिए उचित और लाभकारी मूल्य तय करने का अधिकार मिला।
2009: गन्ने के पुराने न्यूनतम वैधानिक मूल्य की जगह उचित और लाभकारी मूल्य की व्यवस्था लागू हुई।


2018: चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत तय की गई। शुरुआत में यह 29 रुपये प्रति किलो थी, जिसे 2019 में बढ़ाकर 31 रुपये कर दिया गया।


2025: नया चीनी नियंत्रण आदेश लागू हुआ, जिसके तहत सरकार को चीनी के उत्पादन, बिक्री, भंडारण, आयात-निर्यात और आवाजाही को नियंत्रित करने के व्यापक अधिकार मिले।
सरकार ने जमाखोरी रोकने के लिए क्या किया?

कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने चीनी कारोबारियों के लिए भंडारण सीमा भी लागू की है। इसका मकसद जमाखोरी और सट्टेबाजी वाले कारोबार को रोकना है, जिससे बाजार में कृत्रिम कमी का माहौल बन सकता है।

बड़े खरीदारों और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए भी भंडारण सीमा तय की गई है। जो इकाइयां हर महीने 10 मीट्रिक टन से ज्यादा चीनी इस्तेमाल करती हैं, उन्हें तय अवधि में 15 दिन से ज्यादा का भंडार रखने की अनुमति नहीं होगी। 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक देशभर में चीनी डीलरों पर 400 टन की स्टॉक सीमा लागू की गई है।


फिर 10 लाख टन चीनी आयात क्यों करनी पड़ी?
निर्यात पर नियंत्रण और भंडारण सीमा जैसे कदम उठाने के बावजूद कीमतों में तेजी बनी रही। इसके बाद सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी को बिना आयात शुल्क के भारत लाने की अनुमति दी। भारत में सामान्य तौर पर चीनी के आयात पर 100 प्रतिशत शुल्क लगता है। लेकिन इस बार तय मात्रा में कच्ची चीनी बिना शुल्क के मंगाई जा सकेगी। यह आयात 31 अक्तूबर 2026 तक किया जा सकेगा। इस कदम का मकसद घरेलू बाजार में चीनी की अतिरिक्त उपलब्धता बढ़ाना है, ताकि मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर कम हो और कीमतों पर दबाव घटे।
चीनी कहां से आएगी?


विश्व बैंक के डब्ल्यूआईटीएस के मुताबिक, भारत ने 2024 में कच्ची गन्ने की चीनी की करीब 31.89 लाख टन खेप आयात की। इसमें अकेले ब्राजील की हिस्सेदारी करीब 99.85 फीसदी थी। भारत ने ब्राजील से करीब 31.85 लाख टन कच्ची चीनी आयात की, जबकि फ्रांस से करीब 31.48 लाख किलो, जर्मनी से 11.28 लाख किलो, पोलैंड से 4.73 लाख किलो और अमेरिका से सिर्फ 90,720 किलो चीनी आयात हुई।



इस बार के आयात में ब्राजील प्रमुख स्रोत हो सकता है। हालांकि ब्राजील से भारत तक चीनी पहुंचने में करीब दो महीने लग सकते हैं। इसलिए आयात का असर तुरंत बाजार में दिखाई देना जरूरी नहीं है। इसका बड़ा असर अक्टूबर के आसपास दिखाई दे सकता है, जब आयातित चीनी घरेलू बाजार में पहुंचनी शुरू होगी।
आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?


चीनी की कीमतों में इतनी तेज बढ़ोतरी का सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा। उत्तर प्रदेश में डेढ़ महीने में ही चीनी के दाम 17 रुपये प्रति किलो तक बढ़ चुके हैं और पिछले एक पखवाड़े से रोजाना एक से दो रुपये की बढ़ोतरी हो रही है। अलीगढ़ में चीनी 61 रुपये किलो तक पहुंच चुकी है। वहीं पंजाब में खुदरा कीमत करीब 65 रुपये किलो और मुंबई, भोपाल समेत कुछ अन्य बाजारों में 58 से 63 रुपये किलो तक पहुंच गई है।


उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 20 अगस्त को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत 55.70 रुपये प्रति किलो पहुंच गई। एक सप्ताह पहले यानी 13 अगस्त को यह 50.98 रुपये, एक महीने पहले 48.18 रुपये और एक साल पहले 46.30 रुपये प्रति किलो थी। यानी एक साल में औसत खुदरा कीमत 9.40 रुपये प्रति किलो, एक महीने में 7.52 रुपये और एक सप्ताह में 4.72 रुपये प्रति किलो बढ़ चुकी है 

Post a Comment

Thank you for connecting with network 80 Media group.

Previous Post Next Post