S.I.R. की आपत्तियों में उलझी जनता, सियासत भी हुई तेज
उत्तराखंड में S.I.R. प्रक्रिया को लेकर आपत्तियों का दौर जारी, कांग्रेस ने उठाए सवाल—सिस्टम की कवायद में आम जनता क्यों हो रही परेशान?
उत्तराखंड में चल रही S.I.R. प्रक्रिया अब महज सरकारी कवायद नहीं रह गई है। प्रक्रिया के तहत सामने आ रही आपत्तियों की बढ़ती संख्या के बीच आम जनता की परेशानी भी लगातार बढ़ती नजर आ रही है। कहीं दस्तावेजों को लेकर असमंजस है तो कहीं नाम और रिकॉर्ड से जुड़ी आपत्तियों ने लोगों को दफ्तरों के चक्कर लगाने पर मजबूर कर दिया है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस प्रक्रिया का मकसद व्यवस्था को दुरुस्त करना है, कहीं वही प्रक्रिया आम आदमी के लिए परेशानी का सबब तो नहीं बन रही?
वहीं इस पूरे मामले में सियासत भी गरमा गई है। कांग्रेस लगातार आरोप लगा रही है कि S.I.R. की प्रक्रिया में आम जनता को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और पार्टीबाजी का असर कहीं न कहीं उन लोगों पर पड़ रहा है, जिनका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं।
आरोपों के बीच अब सवाल प्रशासनिक व्यवस्था पर भी उठने लगे हैं—अगर आपत्तियां जायज हैं तो उनका समाधान कितनी तेजी से हो रहा है और अगर आपत्तियां बेबुनियाद हैं तो आम जनता को बार-बार दस्तावेज लेकर कार्यालयों के चक्कर क्यों लगाने पड़ रहे हैं?
S.I.R. को लेकर राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप अपनी जगह हैं, लेकिन इस पूरी कवायद के बीच सबसे अहम चेहरा आम मतदाता का है। चुनावी राजनीति के शोर में कहीं ऐसा न हो कि सिस्टम और सियासत की रस्साकशी में वही जनता पिस जाए, जिसके नाम पर पूरी प्रक्रिया की जा रही है।
अब निगाहें प्रशासन की कार्यप्रणाली और आने वाले दिनों में सामने आने वाले आंकड़ों पर हैं। सवाल सिर्फ S.I.R. का नहीं, बल्कि यह भी है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बनाने की कोशिश कहीं आम आदमी के लिए कागजी जंग तो नहीं बन रही?
संवाददाता चित्रांश सक्सैना / काशीपुर